मंत्र · भगवान शिव
महामृत्युंजय मंत्र
ऋग्वेद (7.59.12) व यजुर्वेद का मंत्र — आरोग्य, दीर्घायु व भय-मुक्ति हेतु। 108 बार जप श्रेष्ठ।
🗓 सोमवार, रोग-संकट के समय
ॐ त्र्यम्बकं यजामहेसुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
अर्थ
हम तीन नेत्रों वाले, सुगंधयुक्त व पोषण बढ़ाने वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं। जैसे पका खरबूजा बेल से सहज अलग हो जाता है, वैसे ही हम मृत्यु के बंधन से मुक्त हों, अमृतत्व से नहीं।