सेवा ही साधना — कार्यक्रम-वार सेवा-प्रमाणपत्र सहित
कौन स्वयंसेवक बन सकता है?
16 वर्ष या अधिक आयु का कोई भी व्यक्ति — विद्यार्थी, गृहिणी, नौकरीपेशा, व्यापारी, सेवानिवृत्त (16–18 वर्ष के लिए अभिभावक की सहमति आवश्यक)।
किसी भी जाति, क्षेत्र या लिंग के भेदभाव बिना — केवल सेवा-भाव, अनुशासन व समय-पालन अपेक्षित।
डॉक्टर, नर्स, शिक्षक, इंजीनियर, फ़ोटोग्राफ़र, रसोइया, ड्राइवर — विशेष कौशल वाले साथियों का विशेष स्वागत।
स्वयंसेवा निःशुल्क है; ट्रस्ट सदस्यता अलग है और अनिवार्य नहीं।
कैसे जुड़ें?
"माँ कामाख्या" मोबाइल ऐप में मोबाइल नंबर से लॉगिन करें।
"कार्यक्रम" में जिस आयोजन (भंडारा, माघ मेला शिविर, चिकित्सा शिविर आदि) में सेवा देनी है, वहाँ "स्वयंसेवक बनें" दबाएँ और सेवा-कार्य चुनें।
ट्रस्ट आपकी उपस्थिति व सेवा की पुष्टि करता है।
हर कार्यक्रम का अलग सेवा-प्रमाणपत्र (क्रमांक व QR सत्यापन सहित) ऐप के "मेरे प्रमाणपत्र" में मिल जाता है — डाउनलोड/प्रिंट करें।
शैक्षिक लाभ
QR से सत्यापित होने वाला सेवा-प्रमाणपत्र — कॉलेज प्रवेश, छात्रवृत्ति, NSS/NCC जैसे सामाजिक-सेवा रिकॉर्ड, नौकरी के बायोडाटा व विदेश अध्ययन आवेदन में सामुदायिक सेवा के प्रमाण के रूप में उपयोगी।
बड़े आयोजनों में प्रबंधन, नेतृत्व, टीम-वर्क व संवाद कौशल का व्यावहारिक अनुभव।
आचार्य जी व विद्वानों के सान्निध्य में संस्कृत, वैदिक कर्मकांड, ज्योतिष व भारतीय संस्कृति सीखने का अवसर; कार्यशालाओं में प्राथमिकता।
नियमित स्वयंसेवकों को अनुरोध पर अनुशंसा-पत्र (Recommendation Letter)।
सामाजिक लाभ
भंडारा, साधु-सेवा, गौ-सेवा व निर्धन छात्र सहायता जैसे कार्यों से सेवा का पुण्य और आत्मिक संतोष।
समाज में पहचान व सम्मान — उत्कृष्ट स्वयंसेवकों का वार्षिक समारोह में प्रशस्ति-पत्र से सम्मान।
समान विचार वाले लोगों, संतों व समाजसेवियों से संपर्क व नेटवर्क।
ट्रस्ट के कार्यक्रमों, शिविरों व विशेष अनुष्ठानों में प्राथमिक आमंत्रण।
स्वयंसेवक की आचार-संहिता
सेवा के समय सात्विक आचरण, नशा-मुक्त रहना और श्रद्धालुओं से विनम्र व्यवहार।
ट्रस्ट के नाम पर किसी से धन/दान न माँगें — दान केवल आधिकारिक माध्यम से।
दिए गए दायित्व व समय का पालन; किसी कारण न आ सकें तो पहले सूचित करें।