मंत्र · माँ गायत्री / सविता देव
गायत्री मंत्र
ऋग्वेद (3.62.10) का महामंत्र — बुद्धि, तेज व सद्विचार हेतु। 108 बार जप श्रेष्ठ।
🗓 प्रतिदिन — प्रातः, मध्याह्न व सायं संध्या
ॐ भूर्भुवः स्वःतत्सवितुर्वरेण्यंभर्गो देवस्य धीमहिधियो यो नः प्रचोदयात्॥
अर्थ
हम उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा (सविता) का ध्यान करते हैं — वह हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करे।