त्रिपिंडी श्राद्ध पूजन
Tripindi Shradh
कुल में अकाल मृत्यु से संतप्त पितरों की मुक्ति; पारिवारिक विवाद, संतान बाधा।
✿ विधि आचार्य विवेक उपाध्याय जी द्वारा

विधि एवं महत्व
यह श्राद्ध विधान के प्रकारों से सबसे उत्तम श्राद्ध माना जाता है । कुल में हुए अकाल मृत्यु से संतप्त पितरों की मुक्ति की कामना हेतु यह किया जाता है। क्योंकि जिन पूर्वजो की अकाल मृत्यु -रोग की असाध्यता , सर्प दश, अग्नि भय, विष , दुर्घटना ,आदि से मृत्यु होती है उनकी उत्तम षोडशी के बाद भी प्रेत योनि से मुक्ति नहीं हो पाती है । वह सभी पितर प्रेत योनि को प्राप्त हो दारुण दुःख का सहन करते हैं । कालांतर में हमारे द्वारा उनकी मुक्ति के उपाय न करने पर वही पितर हमें नाना प्रकार के कष्टों का भोग कराते हैं।
इनके संतप्त होने से परिवार में आपसी विवाद, सुख की कमी, अशांति ,दुर्भाग्य , अनचाही घटनाएं ,असामयिक मृत्यु ,असंतोष ,अपव्यय ,व संतान बाधा ,आदि की समस्या उत्पन्न होने लगती है।
अत: जीवन में उपरोक्त समस्याओं के अकारण आने पर निश्चित ही यह ध्यान दें कि कहीं ना कहीं हमारे पितृ संतप्त है। अतः उन्हें संतुष्ट करने हेतु हमे त्रिपिंडी श्राद्ध पूजा को करना परम आवश्यक है।
श्राद्ध के निमित्त शुद्ध स्थान:
- प्रमुख रूप से काशी के पिशाच मोचन तीर्थ पर त्रिपिंडी श्राद्ध करना श्रेयस्कर बताया गया है।
- त्रयंबकेश्वर तीर्थ नासिक में भी इस श्राद्ध को करना श्रेयस्कर माना गया है।
- किसी भी नदी तट या पीपल वृक्ष के समीप भी यह श्राद्ध विधिपूर्वक किया जा सकता है।
- इस क्रिया से प्रसन्न होकर हमारे पितृ गण हमें संतान सुख ,समृद्धि व नाना प्रकार की सौख्यता को प्रदान करते हैं।
विशेष रूप से: कार्तिक से चार माह (कार्तिक, अगहन ,पौष ,माघ ) मैं यह श्राद्ध कर्म अती श्रेयस्कर बताया गया है।
विशेष परिस्थितियों में कभी भी उचित मुहूर्त के साथ इस श्राद्ध विधि को संपादित किया जा सकता है।
पूजन सामग्री सूची
संपूर्ण किट का अनुमानित मूल्य: ₹6,200
इस पूजा हेतु विशेष सामग्री
- काला तिल500 ग्राम
- जौ का आटा1 किलो
- कुशा2 गड्डी
- ब्रह्मा-विष्णु-रुद्र प्रतिमा (स्वर्ण/रजत/ताम्र)1 सेट
- सफेद, लाल, काला वस्त्र1-1 मीटर
- पत्तल-दोना21 नग
सामान्य पूजन सामग्री (हर पूजा में)
- रोली / कुमकुम1 पैकेट
- हल्दी (पिसी)50 ग्राम
- अक्षत (साबुत चावल)500 ग्राम
- मौली / कलावा2 गोला
- जनेऊ5 जोड़ा
- सुपारी21 नग
- लौंग10 ग्राम
- इलायची10 ग्राम
- कपूर1 डिब्बी
- धूप / अगरबत्ती1 पैकेट
- देसी घी250 ग्राम
- रुई बत्ती (गोल व लंबी)1 पैकेट
- गंगाजल1 बोतल
- शहद50 ग्राम
- पान के पत्ते11 नग
- नारियल (पानी वाला)2 नग
- फूल माला5 नग
- खुले फूल250 ग्राम
- दूर्वा1 गड्डी
- आम के पत्ते1 गड्डी
- पंचमेवा100 ग्राम
- मिठाई / प्रसाद500 ग्राम
- ऋतु फल5 प्रकार
- लाल / पीला वस्त्र (चौकी हेतु)1.25 मीटर
- कलश (तांबा/मिट्टी)1 नग
- दीपक (मिट्टी)5 नग
- चौकी / पाटा1 नग
- आसन2 नग
हवन सामग्री (जहाँ हवन हो)
- हवन कुंड1 नग
- आम की लकड़ी (समिधा)5 किलो
- हवन सामग्री (मिश्रित)1 किलो
- काला तिल250 ग्राम
- जौ250 ग्राम
- गुग्गुल50 ग्राम
- अतिरिक्त देसी घी500 ग्राम
- नवग्रह समिधा1 सेट
- सूखा नारियल (गोला)2 नग
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
त्रिपिंडी श्राद्ध पूजन की दक्षिणा कितनी है?
ट्रस्ट की मानक दक्षिणा: सामान्य (1 पंडित) — ₹7,100; विशेष (3 पंडित) — ₹15,000। सामग्री किट लगभग ₹6,200। ऊपर दी गई राशि केवल पूजा-विधि की मानक दक्षिणा है — पुजारी जी अपने क्षेत्र के अनुसार इसमें थोड़ा कम-अधिक रख सकते हैं। आने-जाने का किराया (यात्रा व्यय), सामग्री (यदि किट नहीं ली), तथा वस्त्र, अन्न, गौ-दान, ब्राह्मण भोजन जैसे दान इसमें शामिल नहीं हैं — ये दूरी व यजमान की श्रद्धा अनुसार आपसी सहमति से अलग तय होते हैं। सब कुछ पूजा से पहले स्पष्ट तय कर लें।
त्रिपिंडी श्राद्ध पूजन में कितना समय लगता है?
सामान्यतः लगभग 4 घंटे, हवन सहित।
त्रिपिंडी श्राद्ध पूजन कब करानी चाहिए?
शुभ समय: कार्तिक, अगहन, पौष, माघ; काशी पिशाच मोचन / त्र्यंबकेश्वर / नदी तट / पीपल। सटीक मुहूर्त हेतु पंचांग देखें या आचार्य जी से परामर्श लें।
त्रिपिंडी श्राद्ध पूजन के लिए क्या-क्या सामग्री चाहिए?
इस पृष्ठ पर पूरी सूची है — विशेष सामग्री: काला तिल, जौ का आटा, कुशा, ब्रह्मा-विष्णु-रुद्र प्रतिमा (स्वर्ण/रजत/ताम्र), सफेद, लाल, काला वस्त्र आदि। संपूर्ण किट का अनुमानित मूल्य ₹6,200।
त्रिपिंडी श्राद्ध पूजन के लिए पंडित कहाँ मिलेंगे?
इसी पृष्ठ पर अपने शहर के सत्यापित पुजारी देखें, जो यह पूजा कराते हैं — रेटिंग देखकर सीधे व्हाट्सऐप पर संपर्क करें। ट्रस्ट कोई कमीशन नहीं लेता।
संबंधित पूजाएँ
नारायण बलि
अकाल/अप्राकृतिक मृत्यु वाले पितरों की सद्गति हेतु नारायण बलि कर्म।
वार्षिक श्राद्ध
दिवंगत परिजन की पुण्यतिथि/पितृ पक्ष में पिंडदान, तर्पण व ब्राह्मण भोजन।
पितृ पक्ष तर्पण
पितृ पक्ष में जल-तिल से तर्पण — पितरों की तृप्ति व आशीर्वाद हेतु।
गया श्राद्ध (पिंडदान)
गया जी में विष्णुपद, फल्गु व अक्षयवट पर पिंडदान — पितरों का मोक्ष।